Saturday, July 11, 2026

….लिखनेंवाले सुनील

पता नही कैसे लिखते है हम दो पंक्तीया
कहते लोग की लिखते हम कविता 

कहते है मन की बॉंते लिखते है हम
पर पता नही मनमें आती कहॉंसे ये बॉंते

लिखनेवाले हाथ होते है हमार
लेकिन लिखानेवाले कौई और

इक दिन जरूर ऐसा आयेगा
जो भी लिखेंगे वो ब्रह्मवाक्य होगा

लिखते रहे लिखते रहे लिखतेही रहेंगे
जबतक हाथ चले तबतक लिखेंगे

चाहो आप लोग पढो या न पढों
भेजते रहेंगे या दो चार कलाम

….लिखनेंवाले सुनील

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