अपनी अपनी आँखोंसे देखलो इक बार
कुछ देख न सकों तो केई बात नही
आकाशमें छाये काले घनेरे बॉंदल
सुरज की रोशनी करदें आँखों को ओझल
जब बरसेंगी चंद पानींके बॅुंदे
हटेंगे काले घनेरे बॉंदल
हो जायेंगी आँखें सूरजकी रोशनीसे चकॉंचोंद
छट जायेगा घनेरा आंधियांरा
घबरानां नही देखकर उस दिव्य तेज को
जो आँखोंकी रोशनी को कर दे चकॉंचोंद
अब मुंदकर इकबार अपनी अपनी आँखें
झांकलो मनके अंदर अपने अपने
उस दिव्य प्रकाश को जान लो
अपनी अपनी दिव्य आंखोंसे
वोही है निर्गुण निराकार परमात्मा
जो है छाया हर और अंदर बाहर
जानलो उसको अपनी अपनी आँखोंसे मनकी
हो जाओगे भावविभोर दर्शनसे उसकी
मैने देखा कल रात को क्या आपने देखा?
Saturday, July 11, 2026
मैने देखा कल रात को क्या आपने देखा?
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