किसी के आँसु देखे जाते नहीं
ऐसा क्युँ होता है पता नहीं
किसी की हँसी देखी जाती नहीं
उस हँसी के पिछे छिपी सिसकी
उस हँसी से पहले सुनायी देती है
ऐसा क्युँ होता है पता नहीं
हालत बुरीं किसकी छिपी नहीं रहती
चाहे करलो कोशिश कितनीही
बुराई किसीकी सही नहीं जाती
हो कोई अपना या हो कोई पराया
दर्द हर किसीका लगता है अपनासा
ऐसा क्युँ होता है पता नहीं
हर कोई पराया अपनासा लगने लगता है
बुराई किसीकी सही नहीं जाती
हो कोई अपना या हो कोई पराया
दर्द हर किसीका लगता है अपनासा
ऐसा क्युँ होता है पता नहीं
हर कोई पराया अपनासा लगने लगता है