Friday, August 10, 2018

न जाने ये मन....

न जाने ये मन कहा खोया रहता है।
न जाने कितने रंगो के धागे बुनता रहता है।


न जाने ये मन किन खयालोंमे खोया रहता है।
न जाने कितने चरित्र बना लेता है।

 

न जाने ये मन किन रंगोंमे खोया रहता है।
न जाने कितनी रंगबीरंगी तस्वीरे बना लेता है।

 

न जाने ये चंचल मन कहा खो जाता है।
न जाने कौनसी दुनिया में घुम आता है।

 

न जाने ये मन....

कुछ लोग यूॅंहीं.....

कुछ लोग यूॅंहीं अच्छे लगतें है।
मनसे यूॅंही अपनेसे लगतें है।

कुछ लोग यूॅंहीं अच्छे लगतें है।
मन के यूॅंहीं सच्चे लगतें है।

कुछ लोग यूॅंहीं अच्छे लगतें है।
मन को यूॅंहीं भानें लगतें है।

कुछ लोग यूॅंहीं अच्छे लगतें है।
मन को जानेपहचानेसे लगतें है।

कुछ लोग यूॅंहीं अच्छे लगतें है।
जनम जनम के साथी लगतें है।

कुछ लोग यूॅंहीं.....