जीने की कोई चाह नही
मरने की कोई राह नही
हर कोई यहॉं जाना पहचाना नहीं
हर कोई यहॉं अंजानासा सहीं
फिर भी लगे हर कोई अपनासा यहीं
फिर भी है हर कोई परायॉंसा सहीं
जानेअंजाने किस राह चला
मॅंझिल की कोई न राह पता
चलते रहे कितने समय से यहॉं
न समझ ये आए जाए तो जाए कहॉं
दिखती है मॅंझिल आखोंसे ओझल
लगती ढलने को आयी सांज
सफर के आखरीं पडाव पर आये है हम
इसके आगे न कोई रास्ता न कोई मॅंझिल
जीए तो किस कारन
और
मरे तो भी किस कारन
जीने की कोई चाह नही
मरने की कोई राह नही
…. लगे तो अपनासा ना लगे तो सपनासा …
15/11/2022
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