कोन हूँ मैं, क्या हूँ मैं
किस की नज़र से ख़ुद को देखूँ
किस की नज़र से ख़ुद को देखूँ
दुनिया के नज़र से ख़ुद को देखूँ
या ख़ुद के नज़र से दुनिया को देखूँ
पता नहीं कौन ग़लत कौन सही
नज़र नज़र की बात यहीं
नज़र नज़र की बात यहीं
क्युँ देखुँ औरों की नज़र से
नज़र मेरी भी तो बुरी नहीं
नज़र मेरी भी तो बुरी नहीं
हर नजारा है खुबसुरत सही
अगर अपना नज़रिया हो सही
अगर अपना नज़रिया हो सही
कौन हूँ मैं क्या हूँ मैं
क्युँ मैं देखुँ औरों के नज़र से
क्युँ मैं देखुँ औरों के नज़र से
देखुँ ख़ुद को ख़ुदा की नज़र से
क्युँ न करूँ यकिन ख़ुद की नज़र पें
कौन हूँ मैं क्या हूँ मै?
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