Sunday, July 13, 2025

… तेरी कविता की राह में सुनील

तरे अंदर वो छुपी बैठी है
कबसे तुझे पुकार रही है

दिलमें तेरे समा गयी है 
तडप रही है बाहर आने

मॉंग रही है अस्तित्व तेरा
चाह रही है जीवन तेरा

पुकार पुकार कर कह रही है
मुझको कोई अपना हाथ दो 

इस कुअेसे मुझको निकाल दो
मुझको कोई अपना साथ दो

कह रही है वो तुमको
भुल गये हो तुम मुझको

खो गये हो न जाने कहॉं तुम
देख न रहे हो मेरी ओर तुम

मुझसे दूर तुम जा चुके हो
मुझसे मुहॅं तुम मोड चुके हो

मुझको मेरा तुम रुप दो
मुझको मेरा तुम गीत दो

मुझको मेरा तुम संगीत दो
मुझको मेरा तुम स्वर दो

हे स्वानंद जागे की कब ये तेरी कला
बरसों से जो सोयी है न जानें कहॉं खोयी है

… तेरी कविता की राह में सुनील

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