Sunday, July 13, 2025

….बांतोंमे उलझा सुनील

हम करते है बांतें उनसे अक्सर
रहते है हमारे दिलमें जो अक्सर

कभी दिखतें नही, ना ही दिखाई देते
फिर भी हर पल दिलमें जो है रहते 

कहते नही कुछ भी वो हमसे
फिर भी लगता है बतियाते वो हमसे

रहते है वो हमारे आखोंसे ओझल
फिर भी दिखाई देते है हरपल

ओंठों पे रहता नाम उनका हर पल
भुलते नही है उनको इक भी पल

सॉंसोमें हमारे रहते है वो हर दम
यॉंदोमें हमारे रहते है वो हर दम

ये बॉंते मै किसकी कर रहा हॅूं
समझ सके तो समझ लो

यदी पहचान सके तो पहचान लो 
क्यॅूं की रहते वो हर किसीके दिल में

….बांतोंमे उलझा सुनील

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