हे भगवान मै क्युं जानू तुझको
मै क्युं समझू तुजको
मै क्युं समझू तुजको
जानना है अगर मुझको जानले तु तेरे भगतको
समझना है अगर मुझको समझले तेरे दासको
आजतक न जान सका मै मुझको
आजतक न पहचान सका मै मुझको
आजतक न पहचान सका मै मुझको
कौन हूं मै कहांसे आया हूं मै
न जानें कहांपे जानेवाला हूं मै
न जानें कहांपे जानेवाला हूं मै
जानें ना मै जानें ना कोई
हम सब है अनजानें एकदूसरेसें
हम सब है अनजानें एकदूसरेसें
फिर भी क्युं लगतें है जानेपहेचानेंसे
सब अपनेंसे लगतें हैं क्युं
सब अपनेंसे लगतें हैं क्युं
हे भगवान तुही जाना पहचानासा है
फिर भी क्युं लगता अनजानासा है
फिर भी क्युं लगता अनजानासा है
कभी तुझे पहचान सकू जानेंअनजानें सही
इतनी समझ मुझको आये कभी
इतनी समझ मुझको आये कभी
… तुझसे अनजानासा सुनील
२६ मार्च २०२४
२६ मार्च २०२४
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