Friday, November 8, 2019

अपनी ज़िंदगी ...

कहते है अपनी ज़िंदगी अपनी होती है।
पर सचमें ज़िंदगी अपनी अपनोंसे जुड़ी होती है।

अपनी ज़िंदगी अपने ख़्वाबोंसे बनती है।
अपनी ज़िंदगी अपनोंके ख़्वाबोंसे पनपती है।

अपनें अपनें पास ना हो तो अपनी ज़िंदगी अपनी
न होती है।
अपनें आसपास हो तो
अपनी ज़िंदगीमें अपनापन होता है।

अपनी ज़िंदगी अपनों के ख़्वाबों को पूरा करने गुज़रती है।
अपनी ज़िंदगी अपनों के चेहरों की मुस्कानसे सुलगती है।

ख़्वाब अपनों के पुरे करनें में गुज़रती है जब अपनी ज़िंदगी।
आधीअधूरीसी ज़िंदगी अपनी पूरी पूरीसी लगने लगती है ज़िंदगी।

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