Tuesday, May 19, 2020

बहती धारा

ये ज़िंदगी है जैसे बहती धारा।
न है इसका कोई किनारा।

 ज़िंदगी यहाँ  ज़रा थमसी गयी है।
साॅंसे यहाँ ज़रा रुकसी गयी है।

ठैहरे है आज लम्हें कुछ ऐसे।
ठैहरे है आज हवॉं के झोंके जैसे।

ठहर नहीं सकती ये आस अपनी।
जब तक है ये साँस अपनी।

थमसी गयी है ये जीवन की धारा।
थमती नहीं है ये विचारों की धारा।

जीवन तो है एक बहती धारा।
न कभी रुकेगी न कभी थमेंगी।

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