क्युॅं ली उन्होंने जिंदगी से ‘ईमर्जन्सी एक्झीट’
रहें थे और कुछ पल जीने की बाकी
ना कोई लगी थी आग कही
ना था आया था भूचाल कही
फिर भी वो चले गये बीन बताये
बाते आधीअधूरी छोड गये
पिछे अपने छोड गये यॉंदे
बितें दिनोंकी सुनहरी यॉंदे
बातोंमें होंगी उनकीही बातें
न भूलेंगी कभी उनकी मुलाकातें
याद उनकी न जायेगी दिलसे कभी
न भूलेगा दिल उनको कभी
आपणाला अचानक सोडून गेलेल्या सर्वांना समर्पित
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