तुम तो हो अंजानी सी
फिर भी जानी पहचानी सी
मेरे हर सांस में बसी सी
फिर भी मुझसे अंजान सी
न नाम है कोई, न पहचान है कोई
फिर भी लागती हो अपनी सी
हर रुपमें मेरे दिलमें बसीसी
तुमही हो मेरी आत्मा अनामिका सी
मेरे रुप रंग का तो नाम हॆ कोई
पर रुह मेरी हर युगमें है अनामिका
फिर भी जानी पहचानी सी
मेरे हर सांस में बसी सी
फिर भी मुझसे अंजान सी
न नाम है कोई, न पहचान है कोई
फिर भी लागती हो अपनी सी
हर रुपमें मेरे दिलमें बसीसी
तुमही हो मेरी आत्मा अनामिका सी
मेरे रुप रंग का तो नाम हॆ कोई
पर रुह मेरी हर युगमें है अनामिका
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